Friday, 15 March 2019

गुमान से बाहर निकलिए, यह विश्व कप है


इस हार की उम्मीद किसी ने नहीं की थी। सभी ने भारत की जीत की उम्मीद की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। आस्ट्रेलिया ने शुरुआती दो मैच हारने के बाद भी लगातार तीन मैच जीत भारत को वो पटखनी दी जिसे वो लंबे समय तक याद  रखेगी। 

ऐसा नहीं है कि क्रिकेट में हार नई बात हो। खेल में हार जीत का सिलसिला चलता रहता, लेकिन यह हार उस समय आई जब आप विश्व क्रिकेट में सबसे मजबूत टीम माने जाते हो। यह हार तब आई जब आप विश्व कप के लिए तैयारी कर रहे हो और विश्व कप जीत के प्रबल दावेदार भी माने जा रहे हो। 

यह हार आपको अपने अंदर झांकने का मौका देती है। बताती है कि अभी तक आप कई मुगालतों में जी रहे थे। उन मुगालते में जिसमें आपको लगता है कि आपकी बल्लेबाजी सबसे मजबूत है। एक समय हुआ करता था जब भारत की बल्लेबाजी बेहद मजबूत हुआ करती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। 

आपके पास क्लास बल्लेबाज हैंं, लेकिन वो मैदान पर क्लास में कभी-कभी आते हैं। बल्लेबाजों में निरंतरत की कमी आपको दिख नहीं रही है। कोहली के अलावा भारतीय टीम में कोई ऐसा बल्लेबाज नहीं है जो लगातार रन बना रहा हो। बीते दो साल मे ंअधिकतर मौकों पर हुआ भी यही है। कोहली आउट तो भारत की नैया डूबी। कभी कभार धोनी, जाधव या कोई और तुक्के में बचा ले जाता है, लेकिन ऐसा इक्का दुक्का ही होता है। 

300 के पार के लक्ष्य को टीम बमुश्किल हासिल कर पाती है और 270-280 के लक्ष्य को भी हासिल करने में पसीने छूट जाते हैं। यहां भी अगर कोहली आउट तो जैसे-तैसे ही जीत मिलती है। कमी कहां हैं। कमी बल्लेबाजी में है। उस बल्लेबाजी में जिसका डंका आप दुनिया में बजाना चाहते हो और बजाते भी हो। 

कई बार ऐसा देखने को मिला है कि टॉप-3 कोहली, रोहित, धवन तीनों फेल होते हैं तो आपकी हार लगभग तय़ होती है। मध्यक्रम में नंबर-4 की खोज आपकी खत्म नहीं हो रही है। कोई न कोई आता-जाता रहता है। हार के बाद भी कप्तान का बयान आता है कि इस हार से हम निराश नहीं है। टीम प्रबंधन कहता हैं कि विश्व कप की टीम लगभग तय है। अगर यही टीम जो आस्ट्रेलिया से अपने घर में हारी है वही विश्व  कप जाएगी तो इस देश में क्रिकेट की समझ रखने वाले से पूछ लीजिए कि उसकी क्या राय है। 

विश्व कप से पहले घर में मिली करारी हार ने आपको झकझोरा नहीं है तो पता नहीं आप किस दुनिया में जी रहे हैं। इस तरह के बयान यही बतात हैं कि आप गुमान में हैं। आप अभी भी मान रहे हैं कि आप जो कर रहे हैं वो सही है। बाकी टीमें फिसड्डी हैं, हम जो टीम लेकर जाएंगे उससे तो हम उन्हें हरा ही देंगे। आपके बयानों के बाद एक ही शब्द दिमाग में आता है। अति आत्मविश्वास। 

आपके पास समय था बल्लेबाजी में कमी को पूरा करने का, लेकिन आसान जीतों में इतिहास खोजने में आप इतने मशगूल थे कि कमियां दिखीं नहीं। ऊपर से पसंदीदा खिलाड़ियों की फेहरिस्त ने आपको कहीं और देखने नहीं दिया। 

मन मर्जी करने की फुर्सत मिलने पर कई बार ट्रेनिंग भी नहीं की तो विदेशी दौरों पर अभ्यास मैच भी उतने नहीं खेले जितने जरूरी थे। कम से कम इस गलती को माना तो था। 

लेकिन बाकी गलतियों का क्या ? कभी ओस तो कभी टीम चयन के कंधे पर जिम्मेदारी ़डालने से पहले आपको सोचना चाहिए कि आपकी कोशिश विश्व की ऐसी टीम बनने की है जो हर परिस्थिति में जीत सकती हो। कई बार तो आपने अपने आप को मौजूदा समय की सबसे अच्छी टीम बता भी दिया है, लेकिन आपको यह समझने की जरूरत है कि विश्व चैम्पियन बनने का सपना रखने वाली या विश्व चैम्पियन कहलाने वाली टीमें हार के लिए परिस्थितियों का बहाना नहीं देतीं। उदाहरण के तौर पर आस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज को ही ले लीजिए। अपने दौर मे ंइन टीमों ने अपने घर से बाहर भी कई जीतें हासिल कीं। 

विश्व कप में जाने से पहले आंखे खोल लीजिए और हकीकत में आ जाइए, हालांकि अब ,समय लगभग खत्म है। इस सीरीज से पहले आपको जितने जबाव देने थे, सीरीज के बाद उससे कई ज्यादा सवाल अब आपके सामने हैं। 

विश्व कप में जाने से पहले आपके पास नंबर-4 का मजबूत खिलाड़ी नहीं दिख रहा है। आपने प्रयोग भी किए लेकिन विफल रहे। वहां लंबे समय से चिंता है। धवन और रोहित के प्रदर्शन में निरंतरता नहीं दिखी, लेकिन उससे भी बड़ी बात तीसरे ओपनर का मजबूुत विकल्प आपके पास नहीं है। लोकेश राहुुल को आप यहां आजामा सकते हैं लेकिन बीते मैचों में उनका प्रदर्शन राहुल को विकल्प तो नहीं बताता है। बाकी आपकी मर्जी. 

धोनी के बाद विकेटकीपिंग में दूसरा विकल्प भी टीम के पास नहीं है। युवा ऋषभ पंत को आप आजमा चुके जो विकेट के पीछे कितने सफल हुए यह सभी ने देखा। फिरोज शाह कोटला में तो उनका गेंद को फर्स्ट टाइम में पकड़ना भी मुश्किल हो रहा था। 
टॉप ऑर्डर के फेल होने के बाद मिडिल ऑर्डर में कौन पारी संभालेगा? या फिर धोनी/ जाधव को अकेले लड़ना होगा (कभी-कभार)। 

हां एक बात का श्रेय टीम को देना होना। एक बेहतरीन गेंदबाजी आक्रमण तैयार करने के लिए। आपके पास विश्व स्तरीय तेज गेंदबाज हैं। बेहतरीन स्पिनर हैं। भारत ने हालिया दौर में जितनी जीतें हासिल की हैं उनमें से आधी से ज्यादा जीतों का श्रेय गेंदबाजों को जाता है जिन्होंने सामने वाली टीम को बड़ा स्कोर बनाने नहीं दिया और बल्लेबाजों के लिए बोर्ड पर ज्यादा रन छोड़े नहीं, लेकिन जिस दिन गेंदबाजों ने ऑफ डे देखा आपके बल्लेबाजों का ऑफ डे तय लगा। गेंदबाजी में भी हालांकि आपके पास चौथे तेज गेंदबाज का मजबूत विकल्प नहीं है, लेकिन जो गेंदबाज हैं वो मिलकर इसकी भरपाई कर सकते हैं। बल्लेबाजी में ऐसा दिख नहीं रहा है।  

इसलिए वो बल्लेबाज बनाइए जो निरंतर रन कर सकें, 10-8 मैचों में से एक-दो मैचों में नहीं। 

खैर! आईपीएल आ गया है। ड्रामा शुरू। 


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