Monday, 11 June 2018

न थकने वाला जुनूनी नडाल



वो कोर्ट पर आता है। कदमों को नापते हुए अपनी जगह लेता है। रैकेट से गेंद को जमीन पर मारता है और तब तक माथे पर बंधी पट्टी के साइड से एक हाथ से बालों को कानों के पीछे करता है। बाल पीछे करने के बाद गेंद हाथ में लेता है। जमीन पर 6-7 दफा मारता है और फिर हवा में उचकते हुए बाएं हाथे से झन्नाटेदार सर्विस करता है। उसे क्ले कोर्ट का बादशाह कहते हैं- राफेल नडाल।

Courtsey : Google
बादशाह उसे ऐसे ही नहीं कहा जाता। लाल बजरी पर इस इंसान ने 11 खिताब जीते हैं। यहां उसका कोई सानी नहीं है। क्ले कोर्ट पर नडाल ने सबसे ज्यादा खिताब जीते हैं। एक दशक से ज्यादा,  लगातार बिना रुके, बिना थके एक ही काम वही शिद्दत से करना जिस शिद्दत से पहली बार किया था। ऐसा वही कर सकता है जिसमें कुछ करने की भूख हो और पागलों की तरह जुनून। नडाल में दोनों हैं तभी 17 ग्रैंड स्लैम उनकी झोली में हैं। वैसे एक और खिलाड़ी हैं जिनमें यह सभी खूबियां हैं, उनका नाम है रोजर फेडरर, लेकिन उन पर लिखाई किसी और दिन अभी जिक्र सिर्फ नडाल का।

लोग एक दशक से लाल बजरी पर सिर्फ उन्हें ही चैम्पियन देखते हैं। नडाल जब उतरें हैं चैम्पियन बने हैं। क्ले कोर्ट पर कोई उन्हें कभी नहीं रोक सका। वह बेहद आसानी से मिट्टी पर किसी को भी मात देते हैं, चाहें फेडरर हों, जोकोविक हों या मरे। आज के टेनिस में नडाल के साथ इन तीनों से बड़ा नाम नहीं हैं, लेकिन क्ले कोर्ट पर यह तीन दिग्गज नडाल से पीछे ही रहे हैं बाकियों की बात ही बेमानी है। लेकिन क्या यह इतना आसान है। जाहिर सी बात है नहीं। नडाल के खेल को देख कर जीत जितनी आसान लगती है हकीकत की किताब में उसमें जीत की भूख और अपार जुनून के साथ लगन है।

एक दशक से नडाल के न तो जुनून में कमी आई है न ही उनकी खिताब जीतने की भूख में। एक समय ऐसा भी था जब कई दिग्गजों ने नडाल का करियर खत्म बता दिया था। कुछ साल पहले जब राफा चोटों से जूझ रहे थे और वापसी करने के बाद फॉर्म के लिए संघर्ष कर रहे थे तभी आवाजें उठीं थी कि नडाल खत्म है, लेकिन कई महान खिलाड़ियों की तरह नडाल ने भी सारी आवाजों को ताबूत में डाल दफना दिया।

एक खिलाड़ी हकीकत में पागल होता है। वो कब कहां से वापसी कर जाए यह कहना मुश्किल है। वो कहां से अपने खेल के स्तर के एक नए मुकाम पर ले जाए वो बता पाना मुमकिन नहीं। उसमें जुनून, सनक, जज्बा कूट-कूट के भरा होता है और इन्हें हमेशा अपने अंदर रखने वाला ही महान बनता हैं, जो राफा हैं। इस तरह का खिलाड़ी कभी हार नहीं मानता और इसिलए उस पर अपनी आलोचनाओं का असर भी नहीं होता। राफा भी इन्हीं खिलाड़ियों में से एक हैं। एक अकेला इंसान जो लाल बजरी की अपनी बादशाहत को दिन ब दिन पुख्ता करता जा रहा। ऐसे रिकार्ड बनाते जा रहा है जिसे तोड़ना नमुमकिन सा लगता है। नडाल बेशक आज 32 साल के हो गए हैं, लेकिन आज भी उनमें 19 साल वाला नडाल दिखता है।

यह इंसान थकता नहीं है। तभी बुरे दौर से निकल कर नडाल ने अपने खेल में सुधार ही किया है और पहले से बेहतर टेनिस खेली है। इस बीच नडाल ने क्या नहीं देखा। चोटें, आलोचनाएं, यहां तक कि नडाल को खड़ा करने वाले अंकल टोनी भी नडाल के पास से रुखसत हो लिए लेकिन नडाल रूके नहीं, उनका जुनून खत्म नहीं हुआ और उनको देखकर अभी तक तो लगता नहीं के चमचमाती ट्रॉफियों को अपने हाथों से उठाने की उनकी ललक कम हुई है। नहीं, वो आज भी वैसे ही है जैसी पहले थी।

उन्होंने जुनून और जीत की भूख की परिभाषा को कई मायने में बदल कर रख दिया है। वो आते हैं और हर साल फ्रेंच ओपन के फाइनल में किसी को हराते हैं और अपने घर के शोकेस में सजाने के लिए एक और ट्रॉफी ले जाते हैं।

राफा के लिए शायद शब्दों में विशेषण की कमी पड़ जाए, लेकिन उनकी ललक में कभी कमी नहीं दिखेगी। 11वां खिताब जीत कर जब वो फिलिप चाट्रियर कोर्ट से बाहर जा रहे होंगे तो वहां कि मिट्टी से वादा करके गए होंगे कि मैं अगले साल फिर आऊंगा और 12वां खिताब लेकर जाऊंगा।

नडाल जैसे जुनूनी खिलाड़ी कम होते हैं और जो होते हैं वो बादशाह ही कहलाते हैं।